अब भागलपुर को मिला पटना से छिन कर यह तोहफ़ा, मुख्यमंत्री ने पलटा अपना फ़ैसला

पटना के फुलवारीशरीफ स्थित शिविर मंडल कारा को तोड़कर वहां आतंकियों, माओवादियों व दुर्दांत अपराधियों के सुरक्षित संसीमन के लिए उच्च सुरक्षा वाली जेल (हाइ सिक्युरिटी जेल) के निर्माण के स्वीकृत्यादेश को रद कर दिया गया है। अब उच्च सुरक्षा वाली यह जेल पटना भागलपुर अवस्थित केंद्रीय कारा परिसर में बनेगी। मुख्यमंत्री और गृह विभाग ने मंगलवार को इस आशय का आदेश जारी कर दिया है।

 

बता दें कि विगत फरवरी में राज्य सरकार ने फुलवारीशरीफ स्थित शिविर मंडल कारा को तोड़कर वहां हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण कराने का फैसला लिया था। इसके लिए राज्य सरकार ने 56 करोड़, 72 लाख रुपये की स्वीकृति भी प्रदान कर दी थी।

 

बाद में पाया गया कि शिविर मंडल कारा, फुलवारीशरीफ के निकट घनी आबादी के बढऩे से भविष्य के दृष्टिकोण से उच्च सुरक्षा वाले इस कारा की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ऐसे में सरकार ने इतनी धनराशि से आतंकियों, माओवादियों व दुर्दांत अपराधियों के लिए उच्च सुरक्षा वाले जेल का निर्माण भागलपुर केंद्रीय कारा परिसर के अंदर कराने का फैसला लिया है।

 

सबौर के हरिजन टोला के समीप 12 मई को पांच वर्षीय दिवाकर कुमार की ट्रक से कुचलकर मौत के बाद सड़क जाम मामले में सबौर पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के विरोध में बड़ी संख्या में लोग बुधवार को शिकायत के लिए एसएसपी कार्यालय पहुंचे। वहां आशीष भारती को नहीं देख वे लोग वापस लौट गए। वे सड़क जाम करने मामले में पुलिस द्वारा जानबूझकर फंसाए जाने की बात कह रहे थे। इस लेकर वे लोग काफी आक्रोशित थे।

 

सबौर पुलिस की कार्यशैली से नाराज लोगों का फूटा गुस्सा

पांच घंटे बाद सड़क जाम के बाद भी पुलिस ने नहीं दर्ज की प्राथमिकी

लोगों का कहना था कि 23 अप्रैल को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के छात्र-छात्राओं ने खराब सड़कों को लेकर शिक्षकों के सहयोग से भागलपुर-कहलगांव मार्ग एनएच 80 करीब पांच घंटे तक जाम कर दिया था। शाम करीब पांच बजे उन लोगों ने कृषि विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के समीप सड़क जाम कर अवागमन बाधित कर दिया था। जाम को छुड़ाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। मगर छात्र-छात्राएं सड़क पर डटे रहे थे। रात 10.00 बजे किसी तरह आश्वासन के बाद सड़क जाम टूटा तो अवागमन शुरू हो पाया।

 

कार्रवाई में दोहरी नीति अपनाने के खिलाफ होगा आंदोलन

पुलिस सड़क जाम करने मामले में अक्सर वरीय अधिकारियों के निर्देश के बाद प्राथमिकी दर्ज करती है। ऐसे में 23 अप्रैल को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के छात्र-छात्राओं द्वारा एनएच 80 जाम करने मामले में वरीय अधिकारियों का निर्देश स्थानीय थानेदार को नहीं मिला। इस लेकर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

 

ऐसे में लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सुजीत कुमार झा ने कहा कि 23 अप्रैल को सड़क जाम मामले में प्राथमिकी नहीं होने से लोग काफी आक्रोशित हैं। लोगों में पुलिस की दोहरी नीति के कारण काफी असंतोष है। उन्होंने इस मामले में जांच कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है अन्यथा आंदोलन करने की बात कही है।

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